उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग


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उत्तर प्रदेश मे सर्वप्रथम एक सदस्यीय अल्‍ संख्यक आयोग की स्थापना एक जुलाई, 1969 को की गयी थी बाद में 26 जून, 1974 में स्व० श्री नसरूल्लाह बेग, सेवानिवृत्त, मुख्य न्यायधीश, मा० उच्च न्यायालय की अध्यक्षता में उ० प्र० अल्प संख्यक आयोग का गठन किया गया। तत्समय आयोग में मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, अनुसूचित जाति तथा जनजाति के एक-एक सदस्य नामित किये गये इसके अतिरिक्त सचिव, राष्ट्रीय एकीकरण विभाग, निदेशक, हरिजन एवं समाज कल्याण एवं पुलिस महानिरीक्षक (विशेष कार्याधिकारी) पदेन सदस्य नियुक्त किये गये। बाद में उ० प्र० अल्प संख्यक आयोग, उ० प्र० को वर्ष 1994 में संवैधानिक स्तर प्रदान किया गया तथा अल्प संख्यकों की श्रेणी में मुस्लिम, सिक्ख-इसाई, बौद्ध, पारसी सम्मिलित किये गये अधिनियम के अनुसार आयोग में अध्यक्ष एवं 6 सदस्य जिनमें एक महिला सदस्य भी नामित होगी।

आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों का कार्यकाल एक वर्ष निर्धारित है।

आयोग के कृत्य निम्नवत् हैं:-

  1. आयोग समस्त या किसी निम्नलिखित कृत्य का पालन करेगा अर्थात:-

  1. उत्तर प्रदेश में अल्प संख्यकों के विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना,

  2. संविधान और राज्य विधान मण्डल द्वारा अधिनियमित विधियों में उपबंधित अल्प संख्यकों से संबंधित रक्षोपाय के कार्यकरण का अनुश्रवण करना।

  3. सरकार के अल्प संख्याकों के हितों के संरक्षण के लिए रक्षोपयके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सिफारिश करना,

  4. अल्प संख्यकों के अधिकार और रक्षोपाय से वंचित किये जाने के संबंध में विनिर्दिष्ट शिकायातों को देखना और ऐसे मामलों को समुचित प्राधिकारियों के समक्ष उठाना,

  5. अल्प संख्यकों के विरूद्ध किसी विभेद से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को अध्ययन करवाना और उनके निराकरण के उपायों की सिफारिश करना।

  6. अल्प संख्यकों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास से संबंधित विवाधकों पर अध्ययन, शोध और विशलेषण का संचालन करना,

  7. किसी अल्प संख्यक के संबंध में सरकार द्वारा समुचित उपाय किये जाने हेतु सुझाव देना,

  8. सरकार को अल्पसंख्यकों से संबंधित किसी विषय और विशेषकर उनके द्वारा अनुभव की जाने वाली कठिनाइयों के संबंध में नियत कालिक या विशेष रिपोर्ट देना और,

  9. कोई अन्य मामला जो राज्य सरकार द्वारा उसे निर्दिष्ट किया जाये।

  1. सरकार उपधारा (1) के खण्ड (ग) में निर्दिष्ट सिफारिशों को, सिफारिशों पर की गई या प्रस्तावित कार्यवाही को स्पष्ट करते हुए और यदि कोई सिफारिश स्वीकार नहीं की गई है तो उसका कारण देते हुए एक ज्ञापन के साथ, राज्य विधान मण्डल के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवायेगी।

  2. आयोग को उपधारा (1) के खण्ड (क), (ख) और (घ) में उल्लिखित कृत्यों के पालन में वह सभी शक्तियाँ होंगी जो किसी सिविल न्यायालय में किसी वाद की सुनवाई के समय निहित है और विशेषकर निम्नलिखित विषयों के संबंध में अर्थात:-

  1. किसी व्यक्ति को सम्मन करना और हाजिर कराना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना,

  2. किसी दस्तावेज को प्रकट और पेश करने की अपेक्षा करना,

  3. शपथ पत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना,

  4. किसी न्यायालय या कार्यालय से कोई लोक अभिलेख का उसकी प्रतिलिपि अपेक्षित करना,

  5. साक्षियों और दस्तावेजों की परीक्षा, के लिए कमीशन जारी करना, और

  6. कोई अन्य विषय जो विहित किया जाये।

अल्पसंख्यक आयोग का पुर्नगठन किया गया दिनांक 12 नवम्बर, 2002 को म० अध्यक्ष ने कार्यभार ग्रहण यिका। आयोग के सभी 6 सदस्यों ने भी कार्यभार ग्रहण कर लिया है,  (जिनका विवरण संलग्न है) । मा० अध्यक्ष ने सर्वप्रथम अल्प संख्यक बाहुल्य जनपदों का दौरा करके उनकीसमस्याओं का अध्ययन किया, मेरठ, मुजफ्फर नगर, देहरादून, नैनीताल, बरेली, शाहजहाँपुर, आगरा में अल्प संख्यकों की समस्याओं को सुनकर अनेक स्थानीय समस्याओं का समाधान स्थानीय अधिकारियों से मौके पर करा दिया। अल्प संख्यकों यह अवगत कराया कि सरकार उनको संविधान में दिये गये अधिकारों के प्रति सजग है तथा अल्प संख्यक आयोग का गठन भी इसी उद्देश्य से किया गया है।

अल्प संख्यकों की समस्याओं से संबंधित शिकायत को संबंधित अधिकारियों को जाँच आख्या एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु पत्र भेजे जाते ( निर्धारित प्रपत्र संलग्न है) निर्धारित अवधि तक जाँच आख्या एवं कृत कार्यवाही की सूचना प्राप्त न होने पर अनुस्मारक पत्र (प्रपत्र संलग्न) भेजे जाते हैं। जाँच आख्या प्राप्त होने पर परीक्षण करके उस पर आयोग द्वारा कार्यवाही की जाती है।

महत्वपूर्ण प्रकरण में मा० अध्यक्ष के विवेक पर सम्मन जारी किये जाते हैं। ( प्रपत्र संलग्न) जिसमें मा० अध्यक्ष महोदय द्वारा सुनवायी की जाती है तथा उस पर आदेश पारित किया जाता है । आयोग द्वारा दिये गये आदेश से संबंधित विभाग को अवगत अवगत करा दिया जाता है और संबंधित अधिकारी को आयोग के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने की अपेक्षा की जाती है।

आयोग को अल्प संख्यकों के आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक विकास से संबंधित शोध/ अध्ययन हेतु रू० 10.00 लाख  (रूपये दस लाख मात्र)  शासन द्वारा उपलब्ध कराया गया, परन्तु इस कार्य हेतु काई उपयुक्त संस्था उपलब्ध न होने के कारण उक्त धनराशि का उपयोग नहीं किया जा सका, जो स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, जवाहर भवन, लखनऊ में जमा है।

आयोग के कार्य को निष्पादित किये जाने हेतु शासन के सचिवालय प्रशासन विभाग द्वारा अधिकारियों/कर्मचारियों की नियुक्ति/ तैनाती की जाती है, आयोग के कार्य के निष्पादन हेतु संलग्न सूची के अनुसार अधिकारियों कर्मचारियों की संख्या का विवरण संलग्न है।

आयोग के अधिकष्ठान व्यय हेतु वर्ष 2001-2002, 2002-2003 हेतु शासन द्वारा क्रमश: रू० 26.75 लाख, 35.00 लाख की धनराशि का प्राविधान किया गया तथा आगामी वित्तीय वर्ष 2003-2004 हेतु आयोग द्वारा रू० 92.00 लाख का अनुमानित व्यय का प्रस्ताव शासन को संदर्भित किया गया है।
 

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