उत्तर प्रदेश वक्फ विकास निगम लि0।

 

उ० प्र० वक्फ विकास निगम लि०
118, जवाहर भवन, लखनऊ

ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि
प्रदेश में स्थित अधिकांशत: औकाफ धन की कमी तथा ठीक तरह से देखभाल न होने के कारण जीर्ण अवस्था के शिकार हैं। अधिकतर वक्फ सम्पत्तियों पर नाजायज़ कब्जे हो गए हैं और इनकी आमदनी इतनी कम हो गयी है कि वाकिफ की इच्छानुसार इनका रख-रखाव और प्रबन्ध एवं संचालन बहुत कठिन हो गया है। उ० प्र० सरकार द्वारा इन औकाफ़ की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के उद्देश्य से 27 अप्रैल, 1987 को उ० प्र० वक्फ विकास निगम लि० की स्थापना की गयी है। उ० प्र० वक्फ विकास निगम लि० द्वारा इन वक्फ सम्पत्तियों पर मैरिज हाल, दुकानें, गेस्ट हाउस आदि के निर्माण का कार्य कर रहा है। उ० प्र० शासन द्वारा स्थापित यह निगम मुस्लिम वक्फ़ मंत्रालय के अधीन कार्यरत है, जिसमें निगम के अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक को सम्मिलित करते हुए अधिकतम 11 निदेशक हैं (संलग्नक-1) जिनकी नियुक्ति उ० प्र० शासन द्वारा की जाती है। यह बोर्ड अपने कार्य क्षेत्र में निगम के संगठन, संशाधन और कार्यकलापों का संरक्षक होता है। निगम का शीर्ष प्रबन्धक प्रबन्ध निदेशक होता है जिसके अधीन एक महा प्रबन्धक कार्यालय का वरिष्ठतम अधिकारी होता है। इस कार्यालय का तकनीकी अनुभाग अभियन्ताओं के अधीन कार्य करता है। निगम का तकनीकी अनुभाग विकास योग्य औकाफ के सर्वेक्षण के अतिरिक्त योजना की स्वीकृति और निर्माण के समस्त कार्यों को पूर्ण कराता है एवं आवश्यकता पड़ने पर वक्फ की सहायता के लिए निर्माण हेतु मानचित्र और उसके आगणन बनाने में बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के सहायता करता है।

  1. निगम की अंशपूँजी
    निगम की अधिकृत अंशपूँजी रू० 1000.00 लाख है जिसमें से रू० 675.00 लाख चुकता अंशपूँजी वर्तमान में शासन द्वारा निगम को प्राप्त करा दकी गयी है। निगम द्वारा इस अंशपूँजी से रू० 649.25 लाख की धनराशि निवेशित कर वक्फ योजनाओं को विकसित किया गया है जिससे लगभग 2200 परिवार लाभान्वित हुए हैं।

  2. निगम के कार्य एवं उद्देश्य
     

  1. औक़ाफ़ा के विकास के लिए उन पर व्यवसायिक एवं आवासीय केन्द्रों, दुकानों, दफ्तरों, हास्टलों, होटलों एवं स्कूलों के निर्माण हेतु योजना बनाने, उन पर कार्यान्वयन कराना एवं मरम्मत आदि का कार्य कराना।

  2. वक्फ सम्पत्तियों पर आवासीय कालोनियाँ की स्थापना करने की योजनाएँ बनाना एवं निर्माण कराना।

  3. वक्फ की आय बढ़ाने के उद्देश्य के वक्फ सम्पत्तियों पर व्यवसायिक अथवा औद्योगिक केन्द्रों की स्थापना हेतु वित्तीय सहायता एवं तकनीकी जानकारी तथा सभी आवश्यक सहायतायें उपलब्ध कराना।

  4. मस्जिदों, दरगाहों, इमामबाड़ों आदि का विकास अनुरक्षण एवं मरम्मत कराना।

  5. वक्फ की ओर से मसाफिरखानों, हास्टलों, लाइब्रेरियों, स्कूलों एवं तकनीकी व्यवसाय की स्थापना कराना।

  6. वक्फ़ संस्थाओं, मुतवल्लियों एवं वक्फ़ के लाभ गृहताओं को लघु उद्योग आदि स्थापित करने में सहायता देना, तकनीकी जानकारी प्रदान करना तकनीकी संस्थाएं एवं शोध प्रयोगशालाएं स्थापित करना।

  7. आवासीय सहकारी, उपभोगता सहकारी, औद्योगिक सहकारी एवं कृषक सहकारी संस्थाएं स्थापित करने में मुतवल्लियों एवं वक्फ के लाभगृहताओं को सहायता प्रदान करना।

  8. विभिन्न दरगाहों तथा मुस्लिम तीर्थ स्थानों, तीर्थ यात्रियों एवं ज़ायरीन को सहायता, विश्राम गृह और उससे सम्बन्धित सुविधा प्रदा करना तथा दरगाहों के वार्षिक उर्स आदि का प्रबन्ध कराना।

  9. वक्फ संस्थाओं के लिए अभियन्त्रण, ठेकेदारी तथा परामर्शदाता के रूप में कार्य करना।

  10. निगम के बुनियादी ढांचे, कार्यक्षमता, मानव शक्ति के अधिकतम उपयोग के साथ अभियन्त्रण, वास्तुविद, ठेकेदार, परामर्शदाता, निर्माणकर्ता, सम्पत्ति विकास कर्ता, वर्किंग/एक्जीक्यूटिंग/इम्पलीमेंटिंग एजेन्सी के रूप में सर्विस चार्जेज, सुपरविजन चार्जेज तथा संन्टेज लेकर कार्य करना। सरकारी अर्द्धसरकारी विभागों अथवा प्राधिकरणों, निगमों, संस्थाओं, स्वायत्शासी संस्थाओं, स्थानीय निकायों और प्रशासन की ओर प्रदत्त निर्माण कार्यों विशिष्ट रूप से सृजित किये गये निधियों के अन्तर्गत किसी विकास कार्यों अथवा लोकसभा/ विधानसभा/विधान परिषद, नगर निगमों अथवा स्थानीय निकायों के मा० सदस्यों के विवेकाधीन से संबंधित विकास/निर्माण कार्यों को प्राप्त कर सम्पन्न कराना।

 

  1. निगम की कार्यप्रणाली
    निगम द्वारा औकाफ की जमीन को 3 वर्षों के लिए लीज़ पर लेकर उस पर निर्माण कार्य कराया जाता है। विकास योजनाओं पर एक समय में अधिकतम रू० 20.00 लाख का निवेश प्रति योजना किया जाता है विशेष परिस्थितियों में यह सीमा रू० 50.00 लाख बढ़ायी जा सकती है इस राशि से अधिक की योजना के लिए निदेशक मण्डल की विशेष स्वीकृति आवश्यक है। निगम द्वारा विकसित की गयी वक्फ़ सम्पत्तियों की आय के 30 प्रतिशत भाग से औकाफ के रख-रखाव तथा शेष 70 प्रतिशत भाग से निगम द्वारा निवेशत धन की वापसी होती है। निगम द्वारा निवेशित धनराशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक दर से सर्विस चार्जेज तथा निर्माण कार्यों के तकनीकी देख-रेख के लिए 15 प्रतिशत सुपरविजन चार्जेज प्राप्त किया जाता है। निर्माण कार्यों को सम्पादित कराये जाने हेतु जिला स्तर पर एक परियोजना विकास समिति का गठन किया जाता है जिसमें निगम का प्रति निधि अध्यक्ष होता है इसके अतिरिक्त वक्फ़ की इन्तिजामियॉ कमेटी का नामित कोई सदस्य/मुतवल्ली, समबन्धित वक्फ़ बोर्ड द्वारा नामित व्यक्ति तथा निगम के अवर अभियन्ता समिति के सदस्य होते हैं। परियोजना विकास समिति द्वारा वक्फ़ परियोजना के निर्माण कार्य से वक्फ़ परियोजना पर निवेशित धनराशि की वापसी तक समस्त कार्य सम्पन्न करती है। निगम द्वारा वक्फ़ योजनाओं के निर्माण पर निवेशित धनराशि मय शुल्क की वापसी के उपरान्त यह विकास समिति समाप्त कर दी जाती है साथ ही लीज़ अनुबन्ध भी स्वत: समाप्त हो जाता है।

  2. निगम द्वारा विकसित वक्फ सम्पत्तियाँ
    निगम द्वारा वित्तीय वर्ष 2005-2006 तक प्रदेश में स्थित 142 वक्फ़ सम्पत्तियों को विकसित करने हेतु रू० 954.43 लाख की स्वीकृति प्रदान की गयी है। निगम द्वारा स्वीकृत वक्फ सम्पत्तियों के सापेक्ष 112 वक्फ़ परियोजनाओं पर रू० 539.77 लाख निवेशित कर 1181 दुकानें, 23 आवासीय सेट, 03 मुसाफिर खाने तथा 04 मैरिज हाल आदि का निर्माण कार्या किया गया है जिसके फलस्वरूप वक्फ़ सम्पत्ति को रू० 63.15 लाख की अतिरिक्त वार्षिक आय प्राप्त हो रही है (संलग्नक-2)।
    निगम द्वारा विकसित वक्फ़ परियोजनाओं के सापेक्ष 35 वक्फ़ परियोजनाओं पर निवेशित रू० 122.84 लाख की समस्त धनराशि मय चार्जेज के निगम को वसूल हो गयी है। उक्त विकसित वक्फ़ परियोजनाओं से रू० 17.43 लाख की अतिरिक्त वार्षिक आय सम्बन्धित वक्फ़ को प्राप्त हो रही है (संलग्नक-3)
    निगम द्वारा स्वीकृत वक्फ़ परियोजनाओं में से 03 वक्फ परियोजनाएं 90.50 लाख की निर्माणाधीन हैं जिसके अन्तर्गत 25 दुकानें, 01 मुसाफिरखाना एवं 01 मैरिज हाल का निर्माण कार्य अन्तिम चरण में है (संलग्नक-4)।
    निगम द्वारा स्वीकृत 05 वक्फ़ परियोजनाओं पर विभिन्न कारणों से उत्पन्न वाद-विवाद के कारण उनका निर्माण कार्य या तो आरम्भ ही नहीं हो सका है अथवा निर्माण कार्य अवरूद्ध हो गया है (संलग्नक-5) तिाा 22 वक्फ परियोजनाओं की औपचारिकताएं पूर्ण न होने के कारण कार्य आरम्भ नहीं हो सका है (संलग्नक-6)।

  3. मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित योजना के अन्तर्गत निगम द्वारा निर्मित छात्रावास/स्कूल भवन।
    उ० प्र० वक्फ विकास निगम लि० द्वारा अपनी आय एवं संसाधनों को बढ़ाने की दिशा में केन्द्र पुरोनिधानित योजना के अन्तर्गत शैक्षिक रूप से प्रदेश के पिछड़े  हुए अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रों में महिला उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में छात्रावास/स्कूली भवनों के निर्माण कार्य प्राप्त किए गए। उक्त के क्रम में निगम द्वारा छात्राओं हेतु 20 शैय्या एवं 100 शैय्या छात्रावासों एवं स्कूल भवनों का निर्माण कार्य भी कराया गया है। उक्त योजना के अन्तर्गत अब तक (20 शैय्या के 4 एवं 100 शैय्या के 5 तथा 50 शैय्या के एक) कुल 10 छात्रावासों एवं 02 स्कूल भवन के निर्माण का कार्य रू० 457.18 लाख की लागत का किया गया है (संलग्नक-7)।

  4. निगम का संगठनात्मक ढाँचा
    निगम का मुख्यालय लखनऊ में स्थित है इसका कोई कार्यालय मण्डल स्तर/जनपद स्तर में स्थापित नहीं है। शासन के आदेश द्वारा अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को निगम की वक्फ़ परियोजनाओं में पदेन परियोजना प्रबन्धक (संलग्नक-8) तथा ज्येष्ठ वक्फ़ निरीक्षक को परियोजना सहायक नामित किया गया है (संलग्नक-9)। इन्हीं के सहयोग से वक्फ परियोजनाओं के विकास का कार्य जनपद स्तर पर किया जाता है। निगम में अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक की नियुक्ति शासन द्वारा की जाती है। निगम के निदेशक मण्डल में 8 सरकारी निदेशक तथा 3 गैरसरकारी निदेशकों की नियुक्ति शासन द्वारा की जाती है।
    शासन द्वारा स्वीकृत पदों का विवरण निम्नवत है:-
     

    क्रमांक पदनाम एवं समूह वेतनमान पदों की संख्या कार्यरत अधिकारियों /कर्मचारियों की सं०
    समूह-क        
    1 अधिशासी अभियन्ता 3100-4500 01 01
    समूह-ख        
    2 सहायक महाप्रबन्धक/ प्रभारी महाप्रबन्धक 2200-4000 01 01
    3 सहायक अभियन्ता 2200-4000 03 00
    4 सहायक वास्तुविद 2200-4000 01 -
    समूह-ग        
    5 अवर अभियन्ता 1400-2600 16 05
    6 लेखाकार 1400-2300 02 01
    7 जूनियर स्टेनोग्राफर 1200-2040 03 01
    8 मानचित्रक 1260-2200 02 01
    9 सहायक ग्रेड-1 1230-2080 04 03
    10 एल० डी० सी० 950-1500 02 02
    11 चालक 950-1500 02 02
    समूह-घ        
    12 दफ्तरी 775-1067 01 01
    13 चपरासी 750-940 01 01
    14 चौकीदार 750-940 01 01
    15 अर्दली 750-940 01 00
  5. निगम के लेखों की अद्यावधिक स्थिति
    लेखाओं का आडिट सर्वप्रथम निगम द्वारा नियुक्त इन्टरनल आडिटर द्वारा सम्पन्न किया जाता है उसके उपरान्त भारत के महालेखाकार के परामर्श से कम्पनी लॉ बोर्ड द्वारा नियुक्त स्टेच्यूटेरी आडिटर द्वारा सम्पन्न किया जाता है तदोपरान्त संबंधित वर्ष के लेखाओं एवं रिपोर्ट को भारत के महालेखाकार को प्रेषित किया जाता है एवं भारत के महालेखाकार द्वारा उक्त लेखों का आडिट कर अपनी रिपोर्ट प्रेषित की जाती है।
    भारत के महालेखाकार द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को निगम की वार्षिक सामान्य बैठक में ग्रहीत कराने के उपरान्त एवं वित्तीय वर्ष के लेखों का आडिट कार्य पूर्ण होता है। एक वर्ष के लेखों का आडिट कार्य पूर्ण होने के उपरान्त ही अगले वर्ष के लेखों का आडिट कार्य स्टेच्यूटेरी आडिटर द्वारा प्रारम्भ किया जाता है।

क्रमांक वित्तीय वर्ष इन्टरनल आडिट स्टेच्यूटेरी आडिट ए० जी० आडिट
1 1987-88 - आडिटेड आडिटेड
2 1988-89 - आडिटेड आडिटेड
3 1989-90 - आडिटेड आडिटेड
4 1990-91 - आडिटेड आडिटेड
5 1991-92 - आडिटेड आडिटेड
6 1992-93 - आडिटेड आडिटेड
7 1993-94 आडिटेड आडिटेड आडिटेड
8 1994-95 आडिटेड आडिटेड आडिटेड
9 1995-96 आडिटेड आडिटेड आडिटेड
10 1996-97 आडिटेड आडिटेड आडिटेड
11 1997-98 आडिटेड आडिटेड आडिटेड
12 1998-99 आडिटेड अनआडिटेड अनआडिटेड
13 1999-2000 आडिटेड अनआडिटेड अनआडिटेड
14 2000-2001 आडिटेड अनआडिटेड अनआडिटेड
15 2001-2002 आडिटेड अनआडिटेड अनआडिटेड
16 2002-2003 आडिटेड अनआडिटेड अनआडिटेड
17 2003-2004 आडिटेड अनआडिटेड अनआडिटेड
18 2004-2005 आडिटेड अनआडिटेड अनआडिटेड
19 2005-2006 आडिटेड प्रगति पर अनआडिटेड अनआडिटेड

  1. निगम के स्थापना वर्ष 1987-88 से वित्तीय वर्ष 2005-2006 तक लाभ/ हानि का विवरण (रू० लाख में)
     

    क्रमांक वित्तीय वर्ष लाभा/ हानि संचयी लाभ/हानि
    1 1987-88 (-) 0.83 (-) 0.83
    2 1988-89 (+) 0.65 (-) 0.18
    3 1989-90 (+) 0.03 (-) 0.15
    4 1990-91 (+) 0.13 (-) 0.02
    5 1991-92 (+) 0.57 (+) 0.55
    6 1992-93 (+) 0.01 (+) 0.56
    7 1993-94 (-) 0.28 (+) 0.28
    8 1994-95 (+) 1.67 (+) 1.95
    9 1995-96 (+) 1.17 (+) 3.12
    10 1996-97 (+) 6.34 (+) 9.46
    11 1997-98 (-) 7.68 (+) 1.78
    12 1998-99 (+) 00.01 (+) 01.79
    13 1999-2000 (+) 10.22 (+) 16.51
    14 2000-2001 (+) 08.70 (+) 25.21
    15 2001-2002 (+) 03.27 (+) 28.48
    16 2002-2003 (+) 06.12 (+) 34.60
    17 2003-2004 (+) 0.81 (+) 35.41
    18 2004-2005 (+) 1.64 (+) 37.05
    19 2005-2006 (-) 9.33 (+) 27.72

  2. निम द्वारा वक्फ योजनाओं पर निवेशित धनराशि एवं वसूली की स्थिति (रू० लाख में)
     

    क्रमांक वित्तीय वर्ष निवेशित धनराशि निवेशित धनराशि के विरूद्ध वार्षिक वसूली योग्य धनराशि वसूल की गयी धनराशि
    1 1987-88 - - -
    2 1988-89 1.02 - -
    3 1989-90 21.31 0.10 -
    4 1990-91 10.90 2.23 -
    5 1991-92 19.35 3.32 2.51
    6 1992-93 8.41 5.26 9.27
    7 1993-94 11.34 6.10 2.65
    8 1994-95 25.11 7.23 7.90
    9 1995-96 35.00 9.74 12.79
    10 1996-97 30.52 13.24 17.89
    11 1997-98 37.04 16.19 27.67
    12 1998-99 44.64 17.76 23.07
    13 1999-2000 66.36 21.13 15.90
    14 2000-2001 94.64 25.83 19.65
    15 2001-2002 37.52 34.45 41.86
    16 2002-2003 57.63 37.07 30.07
    17 2003-2004 31.75 40.32 29.63
    18 2004-2005 101.36 39.99 24.02
    19 2005-2006 15.35 47.07 21.50
      योग 649.25 327.03 298.39
  3. उ० प्र० वक्फ विकास निगम लि० की वर्तमान आर्थिक स्थिति-:
     निगम द्वारा विकसित की गयी वक्फ सम्पत्तियों से इतनी आय अर्जित नहीं हो पा रही है कि निगम अपने व्ययों की प्रतिपूर्ति कर सके जिसके कारण निगम द्वारा अपने आन्तरिक संसाधनों में वृद्धि करने का प्रयत्न किया जाता रहा है। उपरोक्त के क्रम में उ० प्र० शासन द्वारा भी शासनादेश संख्या-906/52/3/96 दिनांक 8 जून, 1996 (संलग्नक-10) के माध्यम से प्रदेश के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं में मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार नई दिल्ली की केन्द्र पुरोनिधानित योजना के अन्तर्गत बालिका छात्रावासों/स्कूल भवनों के निर्माण कार्य, स्थल चयन एवं प्रस्ताव तैयार करने हेतु निगम को अधिकृत किया गया तथा साथ ही उक्त कार्यों के सफल क्रियान्वयन हेतु शासनादेश संख्या 281/52-2/936/87 दिनांक 05.05.1997 (संलग्नक-11) द्वारा निगम में एक इंजीनियरिंग डिवीजन की स्थापना की गयी।
    उ० प्र० शासन द्वारा अपने उक्त आदेशों के अनुक्रम में वर्ष 1997 से वर्ष 1999 तक मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली की केन्द्र पुरोनिधानित योजना के अन्तर्गत शैक्षिक रूप से प्रदेश के पिछड़े हुए अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रों में स्थित रू० 457.18 लाख के 12 बालिका छात्रावासों/स्कूल भवनों का निर्माण कार्य निगम को आवंटित किया गया जिसका निर्माण कार्य पूर्ण कराकर संबंधित विद्यालयों के प्रबन्ध समिति को हस्तगत करा दिया गया है। इसी अनुक्रम में उ० प्र० शासन द्वारा उक्त योजना के अन्तर्गत ही प्रदेश में स्थित अल्पसंख्यक विद्यालयों में 11 छात्रावास एवं 11 विद्यालय भवन के निर्माण हेतु रू० 2108.37 लाख का निर्माण कार्य निगम को आवंटित किया गया परन्तु कतिपय कारणों से निगम को आवंटित उक्त समस्त निर्माण कार्य उ० प्र० समाज कल्याण निर्माण निगम को आवंटित कर दिया गया। निगम को आवंटित उक्त कार्य अन्य विभाग को हस्तान्तरित हो जाने के कारण निगम की आर्थिक स्थिति दिन-प्रतिदिन क्षीर्ण होती जा रही है। कम्पनी अधिनियम 1956 की धारा 18(1) के अन्तर्गत निगम के मेमोरण्डम ऑफ एसोसिएशन में उल्लिखित मुख्य उद्देश्यों में नया उद्देश्य सं० 10 जोड़ जाने की कार्यवाही पूर्ण कर निगम को कार्यदायी संस्था के रूप मं स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी अनुक्रम में यह भी संज्ञान में लाना है कि वित्त (व्यय नियन्त्रक) अनुभाग-8 के आदेश संख्या-ई-8-667/दस-06-89/2004 दिनांक 6 जून, 2006 (सलंग्नक-12) द्वारा शासकीय निर्माण कार्यों के सम्पादन के सम्बन्ध में यह व्यवस्था स्थापित है कि भवन निर्माणसम्बन्धी स्वकीय विभागीय कार्य जो उ० प्र० सरकार की विभिन्न निर्माण इकाईयाँ कर रही हैं, वे निर्माण इकाईयाँ इस शासनादेश से आच्छादित नहीं होगी। इस से स्पष्ट है कि निगम अपने विभागीय कार्य को सम्पादित करने हेतु अधिकृत है।
    उपरोक्त के अनुक्रम में पुन: अवगत कराना है कि वक्फ सम्पत्तियों की आय मात्र से निगम के अधिष्ठान/प्रशासनिक व्ययों की प्रतिपूर्ति सम्भव नहीं हो पा रही है। जिसके फलस्वरूप वित्तीय वर्ष 2005-06 में निगम को लगभग रू० 9.33 लाख की हानि हुई है तथा चालू वित्तीय वर्ष 2006-07 में भी हानि होना सम्भावित है। यहाँ यह भी अवगत कराना है कि उ० प्र० सुन्नी सेन्ट्रल बोर्ड आफ वक्फ़ से वक्फ़ सम्पत्त्यिों के विकास हेतु वाँछित विभिन्न 07 वक्फ़ परियोजनाओं पर लीज़ अनुमति प्राप्त नहीं हो रही है जिसके सम्बन्ध में विभागीय मंत्री जी ने भी अपने पत्रांक 189/वक्फ़/मं.ल.सि./मु.व/06 दिनांक 16.05.2006  (संलग्नक-13) द्वारा यह आदेश निर्गत किया है कि उ०प्र० वक्फ विकास निगम लि० को वक्फ़ अधिनियम 1995 की धारा-56  (संलग्नक-14) के अन्तर्गत लीज़ के प्रतिबन्ध से अवमुक्त किए जाने के आदेश निर्गत होने के उपरान्त भी उ० प्र० सुन्नी वक्फ़ बोर्ड से लीज़ अनुमति लम्बे अन्तराल से प्राप्त नहीं हो पा रही है जिसके परिणाम स्वरूप निगम के पास कोई निर्माण कार्य नहीं है। निगम की कोई आय न होने के कारण निगम को शासन से प्राप्त होने वाली अंशपूँजी से निगम के स्थापना पर होने वाले व्ययों को किया जा रहा है।

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