उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम लि0

अल्पसंख्यक के कल्याण हेतु भारत सरकार के 15 सूत्रीय कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रदेश सरकार द्वारा उ0प्र0 अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास का गठन 17 नवम्बर, 1984 को कम्पनी के रूप में किया गया। निगम की अधिकृत पूंजी रूपया 30.00 करोड़ है। इसका रजिस्टर्ड कार्यालय सातवां तल, जवाहर भवन, लखनऊ में स्थित है। जिला स्तर पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी निगम के पदेन जिला प्रबन्धक के रूप में कार्य करते हैं। निगम द्वारा टर्मलोन योजना अपनी अंशपूंजी तथा राष्ट्रीय अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम से प्राप्त ऋण से संचालित की जाती है। मार्जिन मनी ऋण योजना का संचालन प्रदेश सरकार से ऋण प्राप्त करके किया जाता है।

व्यवसायिक प्रशिक्षण /कौशल सुधार योजना तथा परीक्षा पूर्व कोचिंग योजना शासन से प्राप्त अनुदान से चलाई जाती है। इसके अतिरिक्त ब्याज रहित शैक्षिक ऋण योजना निगम द्वारा चलाई जाती है।      

          उत्तर प्रदेश वक्फ विकास निगम लि0

प्रदेश में अवकाफ की सुरक्षा एवं विकास तथा उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने के उद्देश्य से इस निगम की स्थापना 27 अप्रैल, 1987 को रूपया पांच करोड़ की अधिकृत अंशपूंजी से की गई है। इसके मुख्य कार्य निम्नलिखित है :-

  1. अवकाफ के विकास हेतु उनकी सम्पत्तियों पर व्यावसायिक एवं आवासीय केन्द्रों, दुकानों, कार्यालयों, होटलों, छात्रावासों तथा विद्यालयों का निर्माण।

  2. अवकाफ की आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन पर व्यावसायिक/ औद्योगिक काम्पलेक्स के निर्माण हेतु वित्तीय सहायता एवं तकनीकी सहाल उपलब्ध कराना।

  3. मस्जिदों, दरगाहों, इमामबाड़ों तथा ईदगाहों आदि का विकास, अनुरक्षण एवं मरम्मत।

  4. वक्फ की ओर से मुसाफिरखानों, होटलों, लाईब्रेरियों, स्कूलों आदि की स्थापना कराना।

  5. वक्फ संस्थाओं, मुतवल्लियों तथा वक्फ के लाभ-गृहिताओं को लघु उद्योग स्थापित करने में सहायता प्रदान करना।

  6. दरगाहों तथा मुस्लिम तीर्थ यात्रियों एवं जायरीन को विश्राम गृह तथा अन्य सुविधायें प्रदान करना और ईदगाहों के वार्षिक उर्स का प्रबन्ध करना।

  7. वक्फ संस्थाओं के लिए सर्वेक्षक, ठेकेदार एवं परामर्शदाता के रूप में कार्य करना।

          उत्तर प्रदेश राज्य हज समिति

प्रदेश के मुस्लिम समुदाय की पारम्परिक हज यात्रा को सुविधाजनक ढ़ंग से सम्पन्न कराने के लिये द हज कमेटी एक्ट के अन्तर्गत उ0प्र0 राज्य हज समिति का नये सिरे से गठन किया गया है। माननीय मंत्री संसदीय कार्य, नगर विकास विभाग समिति के अध्यक्ष हैं।

          उत्तर प्रदेश सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड

वक्फ अधिनियम 1995 के अन्तर्गत उ0प्र0 सुन्नी सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड की स्थापना वर्ष 1999 में की गयी। उत्तर प्रदेश राज्य के पुर्नगठन के फलस्वरूप उत्तर प्रदेश सुन्नी सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड 06 अगस्त, 2003 से विघटित हो चुका था परन्तु वित्तीय वर्ष 2004-05 में बोर्ड का गठन कर दिया गया है।

वक्फ बोर्ड के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:-

  1. अवकाफ का पंजीकरण करना।

  2. मुतवल्ली/प्रबन्ध समिति की नियुक्ति एवं उसे हटाया जाना।

  3. अनाधिकृत रूप से कब्जा/बिक्री की गई वक्फ सम्पत्ति का कब्जा वापस लेना।

  4. वक्फ सम्पत्तियों से सम्बन्धित मुकदमों की पैरवी।

  5. वक्फ विकास निगम की सहायता से वक्फ सम्पत्तियों का विकास। बोर्ड की आय का मुख्य स्त्रोत अवकाफ की आय से प्राप्त होने वाला अंशदान है।

           उत्तर प्रदेश शिया सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड

वक्फ अधिनियम-1995 के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश शि सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड की स्थापना वर्ष 1999 में की गयी। उत्तर प्रदेश राज्य के पुर्नगठन के फलस्वरूप उत्तर प्रदेश शिया सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड 06 अगस्त, 2003 से विघटन हो चुका था परन्तु चालू वित्तीय वर्ष 2004-05 में बोर्ड का गठन कर दिया गया। इस बोर्ड के कार्य भी सुन्नी वक्फ बोर्ड के समान है।

          उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग

प्रदेश में अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा एवं अनकी समस्याओं का अध्ययन करके समय-समय पर सरकार को परामर्श देने के उद्देश्य से 1969 में अल्पसंख्यक आयोग का गठन किया गया। उ0प्र0 अल्पसंख्यक आयोग, अधिनियम 1994 के अन्तर्गत आयोग में एक अध्यक्ष एवं छ: सदस्यों को नियुक्त कर उसे फंक्शनल बताया गया है।

रजिस्ट्रार/ निरीक्षक, अरबी फारसी मदरसाज, उत्तर प्रदेश

अरबी फारसी मदरसों के निरीक्षण एवं उनके प्रशासनिक मामलों की देखरेख के लिये निरीक्षक, अरबी फारसी मदरसा का कार्यालय पूर्व में शिक्षा विभाग के अधीन इलाहाबाद में स्थित था। मदरसों का कार्य अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को स्थानान्तरित हो जाने के बाद वर्ष 1997-98 में यह कार्यालय अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय के नियंत्रण में आ गया है तथा अब यह कार्यालय इलाहाबाद से लखनऊ स्थानान्तरित कर दिया गया है इस कार्यालय में निरीक्षक, अरबी फारसी मदरसा के अतिरिक्त वरिष्ठ सहायक का एक पद, वरिष्ठ लिपिक के तीन पद, कनिष्ठ लिपिक का एक पद तथा चतुर्थ श्रेणी के दो पद पर स्वीकृत हैं। निरीक्षक, अरबी-फारसी मदरसा ही अरबी-फारसी परीक्षाओं के पदेन रजिस्ट्रार के रूप में कार्य करता है। बोर्ड का मुख्य कार्य मदरसों की आलिया स्तर तक की परीक्षाओं का संचालन करना तथा मदरसों को मान्यता प्रदान करता है। बोर्ड द्वारा फारसी भाषा की मुंशी तथा अरबी भाषा की मौलवी (हाईस्कूल स्तर), आलिम (इण्टर स्तर) एवं फाजिल (स्नातक) तथा फारसी भाषा की मंशी (कक्षा-10 स्तर) और कामिल की बोर्ड परीक्षाओं का संचालन किया जाता है।

शैक्षिक सत्र वर्ष 2005 की परीक्षायें मई 2005 में सम्पन्न करा कर परीक्षाफल घोषित किया जा चुका है। अंक पत्र एवं प्रमाण-पत्र (सनदें) सम्बन्धित मदरसों में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के माध्यम से प्राप्त करा दी गयी है। शैक्षिक सत्र वर्ष 2006 की परीक्षा 2006 में कराया जाना प्रस्तावित है।

अरबी तथा फारसी परीक्षायें, उ0प्र0 द्वारा संचालित कामिल तथा फाजिल परीक्षा को भी प्रदेश के विश्वविद्यालयों द्वारा क्रमश:स्नातक एवं स्नात्कोत्तर उपाधि के समकक्ष मान्यता दिये जाने हेतु रजिस्ट्रार, अरबी-फारसी परीक्षायें, उत्तर प्रदेश के स्तर से समस्त विश्वविद्यालयों से अनुरोध किया गया है जो उनके स्तर पर विचाराधीन है।

प्रदेश के गैर मान्यता प्राप्त अरबी फारसी मदरसों की विभिन्न जनपदों में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों के माध्यम से मान्यता प्रदान किये जाने हेतु प्राप्त प्रस्तावों पर शासन द्वारा गठित मान्यता समिति (जिसके अध्यक्ष, निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण, उ0प्र0) द्वारा लिये गये निर्णयानुसार ही रजिस्ट्रार, अरबी फारसी परीक्षायें, उ0प्र0 द्वारा मान्यता प्रमाण-पत्र निर्गत किये जाते हैं। इस सम्बन्ध में सकारात्मक प्रगति के उद्देश्य से शासनादेश सं0 1126/52-3-2003-11 (4) /2003 दिनांक 22.4.2003 के अनुसार तहतानिया तथा फौकानिया स्तर तक की मान्यता जिला स्तर पर प्रदान करने के आदेश निर्गत किये गये हैं। प्राप्त प्रस्तावों पर जिला स्तर पर गठित समिति के निर्णयानुसार मान्यता प्रमाण-पत्र जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा जारी किये जाते हैं।

राज्य में मदरसा शिक्षा परिषद की स्थापना और उससे सम्बन्धित अनुषंगिक विषयों की व्यवस्था हेतु उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम 2004 (उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्य-29 सन् 2004) अधिनियमित किया गया है। उ0प्र0 मदरसा शिक्षा परिषद के गठन से सम्बन्धित कार्यवाही की जा रही है।

          वसीका कार्यालय, हुसैनाबाद, लखनऊ

तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी के माध्यम से अवध के तत्कालीन शासकों से चल/अचल सम्पत्ति के रूप में कुछ धनराशि अनुबन्ध पत्र पर ऋण स्वरूप प्राप्त की थी। अनुबन्ध के अनुसार उक्त ऋण पर ब्याज की धनराशि को ऋणदाताओं द्वारा इंगिम उनके उत्तराधिकारीयों/ सेवकों को पीढ़ी दर पीढ़ी वसीका के रूप में अदा की जाती है। वसीका वितरण हेतु एक अलग वसीका कार्यालय स्थापित है जो पूर्व में भारत सरकार के नियंत्रण में था। वर्ष 1957 से यह कार्यालय उत्तर प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में आ गया। वर्ष 1995-96 में उ0प्र0 सरकार में पृथक अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का गठन होने के बाद इसे इस विभाग के अधीन कर दिया गया। वसीका कार्यालय द्वारा आठ प्रकार के वसीकों, 11 प्रकार के राजनीतिक पेन्शनों तथा 13 प्रकार के अमानती नोट पर ब्याज का भुगतान किये जाने के साथ-साथ काला इमामबाड़ा तथा मिर्जा अली खां के मकबरे के नियंत्रण/ देखरेख का कार्य भी किया जाता है।

कापीराइट 2007 | अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ़ विभाग , उत्‍तर प्रदेश सरकार, भारत | 1024x768 पर सर्वोत्तम दृष्‍टि