निरीक्षक/रजिस्ट्रार, अरबी फारसी मदरसाज, उ0प्र0, लखनऊ।

  1. प्रस्तावना
    राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में उत्तर प्रदेश मदरसाज वाकेशनल ट्रेनिंग स्कीम, संचालित करने का निर्णय लिया गया है। मदरसों में तालीम-याफूता बच्चों में आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देते हुए इस प्रशिक्षण से प्रदेश में अल्पसंख्यक के मुस्लिम समुदाय के बच्चों का न सिर्फ कौशल सुधार होगा बल्कि उन्हें औद्योगिक प्रशिक्षण प्राप्त होने पर रोजगार मिलने के अवसर बढ़ जायेंगे। इतना ही नही मदरसों के बच्चे यदि योजनाबद्ध तरीके से ऐसा औद्योगिक प्रशिक्षण प्राप्त कर लेते हैं तो वे स्वयं अपने राजगार के लिए छोटे पैमाने पर निजी इकाई वगैरह भी स्थापित कर सकते हैं। इस अमल में मुस्लिम बच्चों में छुपी हुई टेक्निकल सलाहियतें भी उभरकर सामने आयेंगी जिन्हें इस्तेमाल करने का मौका इस प्रशिक्षण से उनहें प्राप्त होगा। यह प्रशिक्षण रोजगार सृजन की अपेक्षाओं के अनुरूप एक अत्‍यन्त प्रभावशाली कदम माना जायगा जो प्रदेश के विकास के लिए भी आवश्यक है।

  2. उत्तर प्रदेश मदरसाज़ वोकेशनल ट्रेनिंग स्कीम की संक्षिप्त रूपरेखा
    राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत इस औद्योगिक प्रशिक्षण योजना के अन्तर्गत प्रदेश में फौकानियां स्तर तक मान्यता प्राप्त कतिपय मदरसों में मिनी आई० टी० आई० की स्थापना की जायेगी। शर्त यह है कि मदरसों में शिक्षण कार्य 3 वर्ष से चल रहा हो। मिनी आई० टी० आई० की स्थापना एवं संचालन के लिए प्रबन्धतंत्र द्वारा एक अनुदेशक सहित 03 ट्रेडों के लिये तीन अनुदेशकों, मुख्य अनुदेशक को सम्मिलित करतेहुए, एकमुश्त मानदेय के रूप में रू० 4000/- प्रतिमाह की दर से , एक लिपिक सह स्टोर कीपर को रू० 3000/- प्रतिमाह की दर से तथा एक प्रयोगशाला परिचर को रू० 2000/- प्रतिमाह की दर से भुगतान किया जायेगा। इस व्यय की प्रतिपूर्ति दो छमाही किश्तों में राज्य सरकार द्वारा स्कीम के सफल संचालन के आधार पर कतिपय शर्तों के अधीन एकमुश्त अनुदान के रूप में की जायेगी। मुख्य अनुदेशक, चूंकि एक ट्रेड के पठन-पाठन/प्रशिक्षण का कार्य सम्पादित करने के साथ-साथ अन्य अपेक्षित प्रशासनिक तथा समन्वय कार्य भी सम्पादित करेगा। अत: मुख्य अनुदेशक को उक्त मानदेय रू० 4000/-  के अतिरिक्त उक्त कार्य के लिए रू० 1000/- प्रतिमाह की दर से अतिरिक्त मानदेय भी दिया जायेगा। मुख्य अनुदेशक कौन होग, इसके बारे में चयन समिति अनुदेशकों की प्रशासनिक क्षमता, उनके अनुभव, उनकी वरिष्ठता एवं शैक्षिक योग्यता को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेगी। इसके अलावा किसी मदरसे के लिए मिनी आई० टी० आई० स्वीकृत हो जाने पर उपकरण क्रय में सहायता स्वरूप केवल एक बार दी जाने वाली एक मुश्त सहायता राशि जिसका ट्रेडवार उल्लेख परिशिष्ट-2 में दिया हुआ है, कतिपय शर्तों के अधीन राज्य सरकार द्वारा दी जायेगी। इसके अतिरिक्त उपरकरणों के अनुरक्षण हेतु आगामी वर्षों में किसी भी ट्रेड के लिए दिये जाने वाली एक मुश्त सहायता अनुदान का 10 प्रतिशत ''अनुरक्षण मद'' में सहायता स्वरूप दिया जायेगा। इस स्कीम को संचालित करने वाले मदरसों के प्रबन्धतंत्र को इस बात की पूरी स्वतंत्रता होगी कि यदि वे राज्य सरकार द्वारा मानदेय के रूप में दिये जाने वाली धनराशि के अतिरिक्त मदरसे के अपने संसाधनों से भी उक्त मार्मिकों को अतिरिक्त मानदेय/ पारिश्रमिक देना चाहें तो वे ऐसा कर सकते हैं। इसी प्रकार उपकरणों एवं साज सज्जा के लिए दिये जाने वाले एकमुश्त अनुदान तथा अनुगामी वर्षों में वार्षिक अनुरक्षण अनुदान के मद में भी मदरसा प्रबन्धतंत्र  स्वयं अपने स्रोतों से भी निवेश एवं व्यय करने के लिए स्वतंत्र होंगे। मदरसों के प्रबन्धतंत्र को यह भी अधिकार होगा कि यदि वे मिनी आई० टी० आई० में तीन से अधिक ट्रेडों का प्रशिक्षण देना चाहें तो उसमें आने वाले समस्त व्यय का वहन अपने निजी स्रोतों से करते हुए अतिरिक्त ट्रेडों की व्यवस्था कर सकते हैं शर्त यह होगी कि अतिरिक्त ट्रेडों के अनुदेशकों एवं ट्रेनिंग पाने वाले अभ्यर्थियों के चयन की प्रक्रिया राज्य सरकार द्वारा सहायतित तीन ट्रेडों के अनुदेशकों एवं ट्रेनिंग पाने वाले अभ्यर्थियों के चयन के ही अनुरूप होगी जिससे कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता का स्तर निम्न न होने पाये। उत्तर प्रदेश मदरसाज वोकेशनल ट्रेनिंग स्कीम के नाम से संचालित इस योजना के लिए पाठ्यक्रम तथा परीक्षा संचालन की प्रक्रिया नेशनल काउसिंल आफ वोकेशनल ट्रेनिंग (एन० सी० सी० टी०) द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम एवं प्रक्रिया के अनुरूप ही होगी तथा परीक्षा का संचालन उत्तर प्रदेश सरकार के नियंत्रणाधीन स्थापित उत्तर प्रदेश अरबी-फारसी मदरसा बोर्ड द्वारा किया जायेगा।
    चूंकि इस कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का लक्ष्य मदरसों में शिक्षा प्राप्त एवं शिक्षारत बालक/बालिकाओं को धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ इस प्रकार का कौशल प्रशिक्षण उनकी अभिरूचि के अनुरूप प्रदान करना भी है जो उनके सेवा योजना प्राप्त करने अथवा स्व:रोजगार स्थापित करने में पूरी तरह सहायक हो। अत: इस स्कीम के अन्तर्गत मदरसों में धार्मिक शिक्षा प्राप्त कर रहे एवं शिक्षा प्राप्त कर चुके बालक/ बालिकायें ही इस योजना का लाभ प्राप्त करने के पात्र होंगे और यह भी कि उक्त उद्देश्य की पूर्ति हेतु विभिन्न ट्रेडों की आवश्यकता के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण की अवधि न्यूनतम एवं वर्ष तथा अधिकतम दो वर्ष होगी।
    इस स्कीम के अन्तर्गत चालू वित्तीय वर्ष के प्रथम चरण में 140 मदरसों में मिनी आई० टी० आई० की स्थापना की जाएगी जिसका जिलेवार लक्ष्य परिशिष्ट-1 पर उपलब्ध है। यदि कोई मदरसा प्रबन्धतंत्र ऐसे ट्रेडों का चयन करता है जिसके उपकरणों आदि पर आने वाला व्यय अन्य कम लागत वाले ट्रेडों से अपेक्षाकृत अधिक हो तो ऐसे मदरसा प्रबन्धतंत्र को तीन ट्रेड के स्थान पर एक अथवा दो ट्रेड के आधार पर ही योजना को संचालित करने की अनुमति भी होगी, परन्तु यह अनुमति इस शर्त के अधीन होगी कि कार्यक्रम संचालन के पाँच वर्षों के अन्दर ऐसे मदरसा प्रबन्धतंत्र को न्यूनतम 03 ट्रेड पर आधारित कार्यक्रम चलाना अनिवार्य होगा। अन्यथा उनकी मान्यता रद्द कर दी जायेगी।
    राज्य सरकार जनहित में यू०पी०एम०वी०टी० स्कीम की इस मार्ग निर्देशिका में भी परिवर्तन/ परिवर्धन कर सकती है जो इस स्कीम से लाभान्वित होने वाली संस्थाओं/ स्वयं सेवी संगठनों तथा कार्मिकों, सभी पक्षों पर संशोधन की तिथि से लागू होगा।

  3. आवेदन की अहर्ता
    उत्तर प्रदेश के ऐसे मदरसे जो यू०पी०एम०वी०टी० स्कीम की आवश्यक औपचारिकतायें एवं न्यूनतम भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति करते हों, उनके द्वारा आवेदन करने पर मदरसे में मिनी आई० टी० आई० स्कीम स्वीकृत की जा सकती है। प्रतिबन्ध यह है कि

  4. योजनान्तर्गत अनुदानित / गैर अनुदानित ऐसे मदरसे पात्र होंगे, जो कम से कम फौकानियां स्तर की मान्यता प्राप्त हो तथा जिनका शिक्षण कार्य 03 वर्ष से चल रहा हो।

  5. मदरसे में किसी तरह का प्रबन्धकीय विवाद न हो।

  6. मदरसे का निजी भवन होना चाहिये। यदि मदरसा किराये के भवन / नि:शुल्क भवन पर चल रहा हो तो कम से कम 10 वर्ष किराये का नोटरी अनुबन्ध / नि:शुल्क उपलब्धता का नोटरी अनुबन्ध हो।

  7. मदरसे में परिशिष्ट-2 में उल्लेखित ट्रेडवार निर्धारित मानक के अनुसार कर्मशाला स्थल और व्याख्यान कक्ष प्रति यूनिट 400 वर्ग फीट माप के होने चाहिये।

  1. मान्यता हेतु आवेदन पत्र व उनकी जांच

  1. मदरसों द्वारा आवेदन पत्र जिसका उल्लेख परिशिष्ट-4 में किया गया है, पर सूचना अंकित करते हुए आवेदन पत्र (तीन प्रतियों में संलग्नक सहित) सम्बन्धित जिले के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के कार्यालय में प्रस्तुत किये जायेंगे।

  2. आवेदन पत्र प्राप्त होने के पश्चात जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी उनके निरीक्षण की कार्यवाही करेंगे। मदरसे का स्थलीय निरीक्षण आवेदन पत्र की प्राप्ति के एक सप्ताह के अन्दर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा किया जायेगा तथा समस्त औपचारिकतायें पूर्ण करने के उपरान्त आवेदन पत्र (आवश्यक अभिलेखों सहित) दो सप्ताह में निदेश, यू०पी०एम०वी०टी० को उपलब्ध कराया जायेगा।

  1. मान्यता समिति

  1. जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय में प्राप्त आवेदन पत्रों के निरीक्षण के उपरान्त अर्ह आवेदन पत्रों को अपर सर्वे कमिश्नर वक्फ / जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा। जिस पर समिति विचार करके अपनी संस्तुति के साथ उपयुक्त अर्ह प्रार्थनापत्रों (आवश्यक अभिलेखों सहित) को निदेशक, यू०पी०एम०वी०टी० को अग्रसारित करेगी।

  2. जिले स्तर पर ग‍ठित समिति द्वारा जिले के लिए निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष 150 प्रतिशत आवेदन पत्र रजिस्ट्रार, अरबी-फारसी मदरसाज बोर्ड / निदेशक, यू०पी०एम०वी०टी० को भेजे जायेंगे जो वरीयता क्रम में होंगे। यह व्यवस्था सिर्फ इसलिए होगी ताकि यदि कोई चयनित मदरसा इस योजना का लाभ उठाना न चाहें तो उसके स्थान पर वरीयता क्रम के दूसरे मदरसे को उसका लाभ दिया जा सके परन्तु मिनी आई० टी० आई० की स्थापना के लिए की जाने वाली कार्यवाहियां जैसे स्टाफ का चयन, अभ्यर्थियों का चयन,  चयनित ट्रेड हेतु मशीन / उपकरण आदि क्रय सम्बन्धी कार्यवाही जिले में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार ही की जायेगी।

  3. जिला स्तर पर गठित समिति का स्वरूप निम्न प्रकार होगा:-

1 अपर सर्वे कमिश्नर वक्फ / जिलाधिकारी अध्यक्ष
2 जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सदस्य संयोजक
3 महाप्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र सदस्य
4 जिलाधिकारी द्वारा नामित मुस्लिम समुदाय के दो ऐसे गैर सरकारी व्यक्ति जो मदरसा शिक्षा के क्षेत्र में ख्याति प्राप्‍त हो सदस्य
  1. सामान्य निर्देश
  1. मदरसों में जिस स्थापित मिनी आई० टी० आई० में जिस वर्ष, जिस ट्रेड में अध्ययनरत छात्र / छात्राओं का परीक्षाफल 60 प्रतिशत से कम होगा उस वर्ष, उस ट्रेड का अनुदान नहीं दिया जायेगा। ऐसी स्थिति में वे अपने निजी व्यय पर प्रश्नगत ट्रेड का संचालन जारी रखने के लिए स्वतंत्र  होंगे, किन्तु जैसे ही परीक्षाफल 60 प्रतिशत या उससे अधिक हो जायेगा अनुदान प्रारम्भ कर दिया जायेगा, परन्तु जिस वर्ष का परीक्षाफल 60 प्रतिशत से कम रहा होगा उस वर्ष के लिए कोई अनुदान देय नहीं होगा।

  2. किसी मदरसे की मिनी आई० टी० आई० के किसी ट्रेड में यदि लगातार तीन वर्ष 60 प्रतिशत से कम परीक्षाफल होगा तो उस ट्रेड की मान्यता निरस्त कर दी जायेगी।

  3. मिनी आई० टी० आई०  में शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों की वार्षिक तथा अन्तिम परीक्षा का संचालन राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति के दिशा निर्देशन में उत्तर प्रदेश अरबी-फारसी मदरसाज बोर्ड के निदेशक, यू०पी०एम०वी०टी० द्वारा किया जायेगा।

  4. रजिस्ट्रार, अरबी-फारसी मदरसा बोर्ड, मिनी आई०टी०आई० के कार्य कलापों की देख-रेख के लिए पदेन निदेशक, उत्तर प्रदेश मदरसाज वोकेशनल ट्रेनिंग होंगे और निदेशक ही उत्तर प्रदेश मदरसाज वोकेशनल ट्रेनिंग के अन्तर्गत मिनी आई०टी०आई० की परीक्षाओं का सफल संचालन के लिए उत्तरदायी होंगे, जो परीक्षा परिणाम घोषित होने पर अपने हस्ताक्षर से परीक्षा अंक तालिका तथा प्रमाणपत्र यथा निर्धारित प्रारूप पर निर्गत करने के लिए अधिकृत होंगे।

  5. राज्य सरकार द्वारा मिनी आई०टी०आई० के संचालन के लिए दिये जाने वाले समस्त प्रकार के अनुदानों का भुगतान निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण, उत्तर प्रदेश द्वारा केवल निदेशक, उत्तर प्रदेश मदरसाज वोकेशनल ट्रेनिंग के लिए लिखित प्रस्ताव / संस्तुति पर किया जायेगा।

  6. निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण, उत्तर प्रदेश मिनी आई०टी०आई० के संचालन के लिए शासन द्वारा दी जाने वाली समस्त धनराशि के लेखा जोखा के लिए उत्तरदायी होंगे तथा अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय के लेखाधिकारी इस कार्य में उनका सहयोग करेंगे, जिसके लिए उन्हें कोई अतिरिक्त वेतन/ भत्ता देय नहीं होगा।

  7. किसी भी मदरसे द्वारा केवल अधिक लागत के तीन ट्रेडों के लिए आवेदन किये जाने पर राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली एक मुश्त सहायता अनुदान की सीमा को दृष्टिगत रखते मदरसा प्रबन्धतंत्र की सहमति से बड़े ट्रेड के साथ कोई कम लागत का ट्रेड भी आवंटित करने के लिए राज्य सरकार अधिकृत एवं स्वतंत्र होगी परन्तु ऐसा करते समय इस बात का ध्यान रखा जायेगा कि जिस क्षेत्र में मदरसा स्थित है वहां का पारम्परिक व्यवसाय क्या है, बालक-बालिकाओं की अभिरूचि क्या है तथा यदि कच्चा माल आवश्यक हो तो कच्चे माल की उपलब्धता कैसी है?

  8. कोई भी ट्रेड एक बार स्थापित किये जाने के बाद उसे न्यूनतम इतने वर्षों तक चलाना अनिवार्य  होगा जितने वर्षों में सम्बन्धित ट्रेड में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे सभी बालक/ बालिकाओं का प्रशिक्षण पूरा होने के साथ-साथ उनके परीक्षा परिणाम घोषित न हो जाये परन्तु कोई भी ट्रेड बन्द करने की अवधि 05 वर्ष से कम न होगी। यदि किसी मदरसे द्वारा उपरोक्त निर्धारित अवधि से पूर्व कोई भी ट्रेड बन्द कर दिया जाता है तो ऐसी स्थिति में राज्य सरकार द्वारा एकमुश्त अनुदान, मानदेय तथा अनुरक्षण आदिके रूप में समस्त धनराशि को राज्य सरकार के अल्संख्यक कल्याण विभाग द्वारा सम्बन्धित मदरसे के प्रबन्धक तथा प्रधानाचार्य से समानुपात में आर० सी० जारी कर भू-राजस्व की भांति वसूल कर लिया जायेगा। मदरसे के एकल संचालन की स्थिति में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी तथा प्रधानाचार्य से वसूल किया जायेगा। अत: कोई भी ट्रेड प्रारम्भ करने के पूर्व मदरसे के प्रबन्धक तथा प्रधानाचार्य के संयुक्त हस्ताक्षर से इस आशय का शपथ पत्र भी देना होगा कि निर्धारित अवधि से पूर्व कोई भी ट्रेड बन्द करने की स्थिति में वह राज्य सरकार द्वारा उपरोक्त प्रकार की समस्त धनराशि को वापस करने के लिए सीधे उत्तरदायी होंगे और ट्रेड बन्द होने के दो माह के अन्दर समस्त धनराशि वापस कर देंगे। उपरोक्त वर्णित निर्धारित अवधि के बाद कोई भी ट्रेड बन्द करने से पूर्व निदेशक, यू०पी०एम०वी०टी० की लिखित अनुमति आवश्यक होगी। कोई भी ट्रेड निर्धारित अवधि के पश्चात् बन्द करने की स्थिति में यदि ट्रेडसे सम्बन्धित उपकरण उपयोगी हो तो निदेशक, यू०पी०एम०वी०टी० द्वारा निर्धारित मूल्य पर सम्बन्धित मदरसेद्वारा किसी अन्य मदरसों को जो उक्त उपकरणों को लेने का इच्छुक हो, हस्तान्तरित करना बाध्यकारी होगा। निदेशक, यू०पी०एम०वी०टी० ऐसे उपकरणों के मूल्य का निर्धारण सम्बन्धित दोनो मदरसों की सहमति से उक्त प्रयोजन हेतु तैनात किसी तकनीकी विशेषज्ञ की स्थलीय जांच रिपोर्ट एवं संस्तुति के आधार पर स्वविवेक से करेंगे।

  9. यदि किसी जिले से स्कीम का प्रस्ताव नहीं प्राप्त होता है अथवा किसी अन्य कारणों से किसी जिले में मिनी आई० टी० आई० का खोला जाना सम्भव नहीं हो पाता तो ऐसे मिनी आई० टी० आई० को प्रदेश के उस जिले को निदेशक, यू०पी०एम०वी०टी० द्वारा आवंटित कर दिया जायेगा जहां मुस्लिम आबादी का प्रतिशत प्रदेश में सबसे अधिक हो, साथ ही उस जिले का उपयुक्त आवेदन पत्र भी लम्बित हो अन्यथा उसके बाद की सबसे अधिक मुस्लिम आबादी प्रतिशत के जिले को आवंटित कर दिया जायेगा बशर्ते उपयुक्त आवेदन लम्बित हो।

  10. जिले स्तर पर गठित चयन समिति द्वारा चयन कर्मियों की सूची का अनुमोदन निदेशक, यू०पी०एम०वी०टी० द्वारा किया जाना अनिवार्य होगा, जिसके उपरान्त ही सम्बन्धित कार्मिकोंको मानदेय का भुगतान किया जा सकेगा।

  11. मदरसे के प्रबन्धक (एकल संचालन की स्थिति में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी), प्रधानाचार्य तथा मुख्य अनुदेशक की संयुक्त समिति, मिनी आई० टी० आई० के कार्मिकों (मुख्य अनुदेशक को छोड़कर) की नियंत्रक प्राधिकारी होगी, जिसकी संस्तुति पर विचार कर किसी भी कार्मिक के विरूद्ध कोई भी कार्यवाही निदेशक, यू०पी०एम०वी०टी० द्वारा की जायेगी। मुख्य अनुदेशक के नियंत्रक प्राधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, प्रबन्धक (एकल संचालन की स्थिति में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी) तथा प्रधानाचार्यकी संयुक्त समिति होगी जिसकी संस्तुति पर मुख्य अनुदेशक के विरूद्ध कोई भी कार्यवाही निदेशक, यू०पी०एम०वी०टी० द्वारा की जायेगी।

  1. मान्यता दिये जाने की शर्ते

  1. यू०पी०एम०वी०टी० स्कीम के अन्तर्गत मदरसों में जो ट्रेड खोले जाने प्रस्तावित हों, उनके लिए ट्रेडवार न्यूनतम् कर्मशाला भावन के नाम का उल्लेख तथा राज्यसरकार स्तर से उपकरण क्रयमें सहायता स्वरूप केवल एक बार दी जाने वाली सहायता राशि का उल्लेख परिशिष्ट-02 पर उपलब्ध है जिसके अनुसार ट्रेड खोले जायेंगे। निरीक्ष्ज्ञण अधिकारी अपने निरीक्षण केदौरान यह सुनिश्चित करेंगे कि ट्रेड नाम के अनुसार खोली गई हैं तथा मशीनें, उपकरण एवं औजार के क्रय पर नियमानुसार व्यय किया गया है।

  2. अन्तिम रूप से स्वीकृति के उपरान्त राज्य स्तर / जिला स्तर के विभागीय नामित अधिकारियों द्वारा निरीक्षण करने पर यदि कोई त्रुटि/ कमी पाईजाती हैतो उस मदरसे की प्रश्नगत ट्रेड का अनुदान रोक दिया जायेगा।

  3. मान्यता प्राप्त मदरसे में नेशनल काउसिंल आफ वोकेशनल ट्रेनिंग (एन० सी० वी० टी०) द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार ही शिक्षा / प्रशिक्षण दिया जायेगा। खोले जाने वाले ट्रेड, प्रति यूनिट छात्र संख्या, पाठ्यक्रम अवधि तथा शैक्षिक योग्यता आदिका विवरण परिशिष्ट-3 पर उपलब्ध है। अभ्यर्थियों के चयन में सम्बन्धित ट्रेड से जुड़े विषय का बेसिक ज्ञान रखने वाले अभ्यर्थियों को वरीयता दी जायेगी। यदि चयनित अभ्यर्थियों में अपेक्षित विषय के बेसिक ज्ञान का अभाव हो तो मदरसा प्रबन्धतंत्र द्वारा सम्बन्धित विषय के बेसिक ज्ञान की व्यवस्था भी अलग से स्वयं के व्यय पवर की जायेगी जिससे की प्रशिक्षणरत बालक / बालिकायें सम्बन्धित ट्रेड में निपुणता हासिल कर सकें।

  4. मान्यता प्राप्त मदरसे के प्रबन्धक या प्रबन्ध समिति का कर्तव्य होगा कि वे उत्तर प्रदेश मदरसा वोकेशनल ट्रेनिंग स्कीम द्वारा निर्धारित किये गये नियमों एवं मापदण्डों का सर्वथा पालन करेंगे।

  5. मदरसे के ऐसे छात्र / छात्राओं जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय गरीबी रेखा के दोगुने से कम होगी, उन्हें पूर्णतया नि:शुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा।

  6. मदरसे में मिनी आई० टी० आई० से प्राप्त समस्त निधियों का लेखा जोखा नियमानुसार रखा जायेगा। प्राप्त सभी धनराशियां डाकघर अथवा राष्ट्रीयकृत बैंकों में ही जमा की जायेगी और उनका आहरण प्रबन्धक तथा प्रधानाचार्य के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। मिनी आई० टी० आई० के एकाउण्ट को नियमानुसार  चाटर्ड एकाउण्टेण्ट से आडिट कराना होगा। मदरसे के एकल संचालन की स्थिति में, इसका संचालन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी तथा प्रधानाचार्य के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

  7. मदरसे की प्रबन्ध समिति द्वारा रू० 25,000/- की धनराशि का स्थायी कोष बनाया जायगा और उसे जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के नाम प्रतिभूत किया जायेगा।

  8. मदरसे के मिनी आई० टी० आई० का निरीक्षण समय-समय पर अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग के नामित अधिकारियों द्वारा कभी भी किया जा सकता है।

  9. मदरसे की प्रबन्ध समिति को मिनी आई० टी० आई० खोलने के लिए अपनी सुविधा अनुसार तीन ट्रेड के चयन करने का अधिकार होगा। प्रबन्ध समिति यदि तीन से अधिक ट्रेड चलाना चाहती हो तो तीन ट्रेड के अतिरिक्त अन्य ट्रेडों पर होने वाले सभी सम्भावित व्ययों  का वहन प्रबन्ध समिति को स्वयं करना होगा। शर्त यह है कि ट्रेडों पर उत्तर प्रदेश मदरसाज वोकेशनल ट्रेनिंग स्कीम के ही नियम लागू होंगे जिसकी स्वीकृति राज्य सरकार से प्राप्त की जानी होगी।

  10. प्रस्तावित किये गये ट्रेड के संचालन हेतु उपकरण / साज सज्जा का क्रय निर्धारित मानकों के अनुरूप होगा।

  1. मिनी आई० टी० आई० चलाये जाने के लिए मदरसों में चयनित किये जाने वाले कार्मिकों की अनिवार्य शैक्षिक योग्यता, अर्हता तथा आयु का विवरण

  1. अनुदेशक (प्रत्येक ट्रेड के लिए एक पद)
     

    (क) सम्बन्धित ट्रेड (व्यवसाय उपक्रम शाखा) में आई० टी० आई० सर्टीफिकेट प्राप्त / सम्बन्धित शाखा  ट्रेडे में इंजीनियरिंग की डिग्री अथवा मान्यता प्राप्त संस्था से डिप्लोमा प्राप्त।
    (ख) नेशनल अप्रेन्टिसशिप सर्टीफिकेट/ टेक्निकल नेशनल ट्रेड सर्टीफिकेट।
    (ग) कार्यशाला / फैक्ट्री अनुभव रखने वाले अभ्यर्थी को वरीयता।
    (घ) अर्ह अभ्यर्थी उपलब्ध न होने की दशा में सेवानिवृत्त अनुदेशक/ फोरमैन / प्रधानाचार्य, आई० टी० आई०/ पालीटेक्निक भी लिये जा सकते हैं परन्तु उनके लिए सम्बन्धित ट्रेड की योग्यता रखना अनिवार्य होगा।
    (य) उर्दू में हाईस्कूल अथवा उसके समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण को वरीयता दी जायेगा। आयु सीमा-दिनांक 01 जुलाई, 2003 को न्यूनतम 21 वर्ष तथा अधिकतम 40 वर्ष।
  2. लिपिक सह स्टोर कीपर - (एक पद)
     
    (क) मान्यता प्राप्त बोर्ड से इण्टरमीडियट, परीक्षा या उसके समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य।
    (ख) उर्दू में हाईस्कूल परीक्षा या उसके समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य। आयु सीमा-01 जुलाई, 2003 को न्यूनतम 18 वर्ष तथा अधिकतम 40 वर्ष।
  3. प्रयोगशाला परिचर- एक पद
     
    (क) फौकानियां अथवा उससे उच्च मदरसा शिक्षा प्राप्त।
    (ख) उर्दू भाषा की जानकारी। आयु सीमा -01 जुलाई, 2003 को न्यूनतम 18 वर्ष तथा अधिकतम 40 वर्ष
  1. मिनी आई०टी०आई०  में आवश्यक सभी कर्मियों के चयन हेतु चयन समिति
    मिनी आई०टी०आई० के संचालन हेतु मदरसों में आवश्यक सभी कर्मियों के चयन के लिये जिला स्तर पर एक चयन समिति गठित की जायेगी जिसका स्वरूप निम्न प्रकार होगा:
     
    1 जिलाधिकारी / अपर सर्वे कमिश्नर वक्फ अथवा उनके द्वारा नामित मुख्य विकास अधिकारी अध्यक्ष
    2 जिलाधिकारी द्वारा नामित अपर जिला मजिस्ट्रेट सदस्य
    3 प्रधानाचार्य, आई०टी०आई० / पालीटेक्निक सदस्य
    4 जिस ट्रेड के अनुदेशक का चयन होना है, उस ट्रेड का आई०टी०आई० / पालीटेक्निक का वरिष्ठतम अनुदेशक सदस्य
    5 सम्बन्धित मदरसे के प्रबन्धक / प्रधानाचार्य सदस्य
    6 जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सदस्य संयोजक
      (क) चयन करते समय इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखा जाय कि चयन पाने वाले अभ्यर्थी प्रबन्ध समिति के किसी भी पदाधिकारी के निकट सम्बन्धी न हों।
      (ख) यदि सम्बन्धित जिले में आई०टी०आई० / पालीटेक्निक न हो तो जिलाधिकारी किसी निकटवर्ती जिले के आई०टी०आई० / पालीटेक्निक के प्रधानाचार्य को नामित कर सकते हैं
      (ग) यदि आई०टी०आई० / पालीटेक्निक में पूर्ण कालिक प्रधानाचार्य न हो तो कार्यवाहक प्रधानाचार्य को नामित किया जायेगा
      (घ) चयन साक्षात्कार पर आधारित होगा जिसमें अधिकतम 40 अंक योग्यता के अधिकतम 40 अंक अनुभव के तथा अधिकतम 20 अंक अभिव्यक्ति/ प्रशिक्षण देने की क्षमता के होंगे। इस प्रकार कुल 100 अंक चयन समिति के द्वारा दिये जा सकेंगे।
      (य) चयन समिति के सदस्यों द्वारा प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए स्वतंत्र रूप से अंक दिये जायेंगे जिसके योग के औसत को अभ्यर्थी के अंक माने जायेंगे। योग्यता तथा अनुभव के लिए अंकों का निर्धारण साक्षात्कार में प्रस्तुत मूल प्रमाण पत्रो के आधर पर पूर्व निर्धारित दिशा निर्देशों के अनुरूप किया जायेगा। यह दिशा निर्देश निदेशक, यू० पी० एम० वी० टी० द्वारा समस्त जिलाधिकारियों अपने पत्र संख्या-112/व० आ०-31 (47)/ 2003 दिनांक 06 फरवरी, 2004 द्वारा जारी किये जा चुके हैं।
  2. मिनी आई०टी०आई० में चयनित हुए मुख्य अनुदेश/ अनुदेशक तथा अन्य कार्मिकों की ड्यूटी व जिम्मेदारी-
     
    (क) मुख्य अनुदेशक की ड्यूटी व जिम्मेदारी निम्न प्रकार होगी:-
      1.

    अनुदेशक के रूप में सम्बन्धित ट्रेड का प्रशिक्षण देना तथा उससे सम्बन्धित समस्त कार्य।

      2. मिनी आई०टी०आई० में लिये गये सभी फैसलों एवं उच्च आदेशों को फौरी तौरपर लागू करना।
      3. योजनाओं के अनुसार ट्रेनिंग के सभी प्रोग्राम चलाना।
      4. समय से कच्चे माल की खरीदारी करवाना, ताकि ट्रेनिंग पाने वाले बच्चों का नुकसान न हो।
      5. मशीनों / औजारों के ठीक ढंग से इस्तेमाल और उनके रख- रखाव की पूरी जिम्मेदारी।
      6. ट्रेनिंग पा रहे बच्चों के काम काज पर कड़ी निगाह रखना और अनुदेशकों का सुपरविजन करते रहना।
      7. ट्रेनीज और अनुदेशकों के बीच अच्छे रिश्ते कायम रखना।
      8. ट्रेनिंग पा चुके बच्चों से सम्पर्क (राब्ता) रखना और उन्हें रोजगार दिलवाने में मदद करना।
      9. मिनी आई०टी०आई० में पूरा कंट्रोल और अनुशासन रखना तथा अनुशासनिक कार्यवाही करना।
      10. सभी एकाउण्टस को ठीक रखवाना / खरीदे गये औजार (टूल्स) और कच्चे माल को स्टोर में रखवाना और उनकी हिफाजत की पूरी जिम्मेदारी।
      11. मुख्य अनुदेशकों की यह भी जिम्मेदारी होगी कि ट्रेनिंग के दौरान अगर यह महसूस होता है कि ट्रेनिंग पाने वाले बच्चों में टेक्निकल जानकारी के लिए अंग्रेजी हिसाब और साइंस वगैरह की मालूमात कम है तो उस कमी को पूरा करने के लिए मदरसे के प्रबन्धतंत्र से विचार-विमर्श करके इन विषयों की जानकारी देने के लिए मदरसे के अपने व्यय पर कोई उपयुक्त व्यवस्था सुनिश्चित करना। इस प्रयोजन के लिए राज्य सरकार से कोई अनुदान देय नही होगा।
    (ख) अनुदेशकों की ड्यूटी व जिम्मेदारी
      1. ट्रेनिंग पाने वाले बच्चों में ट्रेनिंग की बुनियादी टेक्निकल बातों को इस तरह से समझाना कि उन्हें समझने में कोई खास परेशानी का सामना न करना पड़े। आवश्यकता होने पर ट्रेनीज को अंग्रेजी, हिसाब और साइंस विषयों की जानकारी भी देते रहना ताकि मदरसे के बच्चे उसमें अपनी दिलचस्पी बढ़ा सकें। फलस्वरूप मिनी आई०टी०आई० के प्रशिक्षण स्तर में गिरावट न आने पाये।
      2. ट्रेनिंग के पाठ्यक्रम के अनुसार निर्धारित सभी कक्षाएं लेना। थ्योरी और प्रैक्टिकल कक्षा लेते हुये ट्रेड का पूर्ण प्रशिक्षण देना और ट्रेनीज को उचित मार्गदर्शन देते रहना।
      3. हाजरी रजिस्टर, प्रगति कार्ड, कच्चे माल का रजिस्टर और बनायी गयी वस्तुओं का रजिस्टर तथा अन्य रिकार्डों को ठीक ढंग से सुरक्षित रखना।
      4. ट्रेनीज के थ्योरी के नोट्स और प्रैक्टिकल की जांच करना और उन्हें सही करना।
      5. ड्राइंग चार्ट व दीगर चीजे तैयार करवाना।
      6. मशीनों की सफाई करवाना और सही काम के लिए उनकी जांच पड़ताल करते रहना ताकि वह हमेशा काम की स्थिति (Working order) में रहें।
      7. ट्रेनिंग के दौरान कच्चेमाल व दीगर जरूरतों को पहले से पूरा कर लेना ताकि बच्चों के समय का नुकसान न हो।
      8. कार्यशाला में सुरक्षा और सावधानी बरतना, विशेष रूप से पावर सप्लाई पर ध्यान रखना।
      9. निर्धारित किये गये कार्यों को कक्षा में सख्ती से लागू रखना और अनुशासन बनाये रखना।
      10 ट्रेनीज से अच्छे रिश्ते रखना।
      11. उच्च अधिकारियों द्वारा समय-समय पर अन्य जो भी कार्य सौंपे जायें उन्हें निस्तारित करना।
    (ग) लिपिक सह स्टोर कीपर
      लिपिक सह स्टोर कीपर की ड्यूटी व जिम्मेदारी निम्न प्रकार होंगी:-
      1. स्टोर सम्बन्धी समस्त लेखों और रजिस्टरों का रख-रखाव।
      2. सौंपे गये स्टोर के सभी सामान को सुरक्षित रखना और समय-समय पर उन्हें अनुदेशकों को उपलब्ध कराना।
      3. औजारों (टूल्स) के वितरण और उनकी वापसी पर विशेष ध्यान रखना।
      4. मुख्य अनुदेशक और अनुदेशकों द्वारा सौंपे गये समस्त कार्य।
      5. स्टोर सम्बन्धी समस्त रजिस्टरों व फाइलों का रख-रखाव।
      6. समस्त लिपकीय कार्य।
      7. उच्च अधिकारियों द्वारा सौंपे गये समस्त कार्य।
    (घ) प्रयोगशाला परिचर
      प्रयोगशाला परिचर की निम्नलिखित ड्यूटी व जिम्मेदारियां होंगी:-
      1. मुख्य अनुदेशक और अनुदेशकों द्वारा सौंपे गये समस्त औजारों की देख-रेख करना तथा उनके रख-रखाव में सहयोग देना।
      2. मशीनों की सफाई,  कच्चे माल की देख रेख तथा टूल्स एवं बनाई गयी वस्तुओं की सुरक्षा।
      3. उच्च अधिकारियों के समस्त आदेशों/ निर्देशों का अनुपालन।
      4. समय-समय पर सौंपे गये अन्य सभी कार्य।
  3. राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति
    सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग, उत्तर प्रदेश शासन की अध्यक्षता में एक समिति होगी जो प्रत्येक 03 माह में न्यूनतम एक बार बैठक करके इस स्कीम की प्रगति का अनुश्रवण करेगी तथा राज्य सरकार के अनुमोदन से इस स्कीम के संचालन के लिए उत्तर प्रदेश अरबी-फारसी मदरसाज बोर्ड को आवश्यक दिशा निर्देश देने के लिए प्राधिकृत होगी। यह समिति इस स्कीम के अन्तर्गत संचालित किसी भी मिनी आई०टी०आई० के स्थल निरीक्षण के लिए भी अधिकृत होगी और इस समिति का स्थल निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही किसी भी मिनी आई०टी०आई० का अनुदान राज्य सरकार द्वारा रोका जा सकेगा अथवा मान्यता रद्द की जा सकेगी। अनुदान रोकने अथवा मान्यता रद्द करने के पूर्व न्यूनतम एक माह का कारण बताओ नोटिस प्रबन्धक को दिया जायेगा, जिसके पश्चात् उत्तर प्राप्त होने पर गुणदोष के आधार निर्णय ले लिया जायेगा। यदि कारण बताओ नोटिस के पश्चात् निर्धारित अवधि में उत्तर प्राप्त नहीं होता है तो यह समझा जायेगा कि प्रबन्ध समिति को कुछ भी नही करना है और तद्नुसार एक पक्षीय निर्णय लेते हुए निर्णय की प्रति प्रबन्ध समिति, उत्तर प्रदेश अरबी-फारसी मदरसाज बोर्ड को प्रेषित की जाएगी। समिति निम्नवत् होगी:-
     

    1. सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग, उत्तर प्रदेश शासन अध्यक्ष
    2. निदेशक, प्राविधिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश अथवा उनके द्वारा नामित संयुक्त निदेशक स्तर का एक अधिकारी सदस्य
    3. निदेशक, श्रम एवं सेवायोजन अथवा उनके द्वारा नामित उपनिदेशक स्तर का एक अधिकारी सदस्य
    4. निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण, उत्तर प्रदेश सदस्य
    5. अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश अरबी-फारसी मदरसा बोर्ड सदस्य
    6. रजिस्ट्रार, अरबी-फारसी मदरसा बोर्ड / निदेशक, यू०पी०एम०वी०टी० सदस्य/ सचिव
    7. प्रधानाचार्य इन्स्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग कालेज,  लखनऊ अथवा उनके द्वारा नामित कोई विशेषज्ञ सदस्य
    8. सर्वे कमिश्नर वक्फ, उत्तर प्रदेश अथवा उनके द्वारा नामित सहायक सर्वे कमिश्नर वक्फ, उत्तर प्रदेश समिति को कोरम न्यूनतम चार सदस्यों का होगा।

    सदस्य

  4. ट्रेनिंग पाने वाले अभ्यर्थियों की चयन प्रक्रिया
    यह आवश्यक है कि मदरसे में वे बालक/ बालिकायें जो इस कौशल प्रशिक्षण में भाग लेने के इच्छुक हों उनकी अभिरूचि ज्ञात कर योग्य अभ्यर्थियों को ही किसी ट्रेड के प्रशिक्षण में प्रवेश दिया जाए। इस प्रयोजन के लिए निम्नानुसार समिति गठित की जाती है जो किसी भी ट्रेड में आवेदन करने वाले छात्र / छात्राओं  का साक्षात्कार लेकर उपयुक्त अभ्यर्थियों को किसी भी ट्रेड में प्रवेश देने की स्वीकृति करेगी। समिति का स्वरूप निम्नवत् होगा:
     

    1. जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी अध्यक्ष
    2. प्रबन्धक, मदरसा समिति सदस्य
    3. प्रबन्धक द्वारा नामित मदरसा प्रबन्ध समिति क दो सदस्य (इनके चयन में सबसे अधिक शिक्षित व्यक्ति को वरीयता दी जायेगी) सदस्य
    4. मदरसे का प्रधानाचार्य सदस्य
    5. मदरसे का मुख्य अनुदेशक सदस्य/ संयोजक
      समिति का कोरम न्यूनतम तीन सदस्यों का होगा  
      (क) उपयुक्त बालक/ बालिकाओं के चयन में मदरसे के बोर्डिंग में रहने वाले बच्चों को प्राथमिकता दी जायेगी। मिनी आई०टी०आई० का सत्र एक वर्षीय पाठ्यक्रम को सत्र प्रत्येक वर्ष अगस्त से प्रारम्भ होकर 31 जुलाई को समाप्त होगा। इसी प्रकार द्वितीय वर्षीय पाठ्यक्रम भी अगले वर्ष नियत की गयी अवधि में पूरी की जायेगी एवं निर्धारित अवधि के पूर्व उक्त कोर्स की परीक्षा एक साथ आयोजित की जायेगी।
      (ख) किसी भी ट्रेड में प्रवेश के लिए अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु माह ए-शाबन की पहली तारीख को 14 वर्ष होना अनिवार्य होगा।
      (ग) अभ्यर्थी के चयन में सम्बन्धित ट्रेड से जुड़े विषय का बेसिक ज्ञान रखने वाले अभ्यर्थियों को वरीयता दी जायेगी।
  5. राजकीय सहायता निर्गत किये जाने के पूर्व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के माध्यम से प्रबन्धतंत्र द्वारा निदेशक, यू०पी०एम०वी०टी० को उपलब्ध कराये जाने वाली सूचना
     
    1. चयनित ट्रेडों के लिए उपकरण क्रय करने के लिए मदरसा प्रबन्धतंत्र द्वारा उपलब्ध कराये जाने वाली धनराशि की उपलब्धता की स्थिति (बैंक एकाउण्ट/पासबुक द्वारा प्रमाणित)
    2. प्रबन्धक द्वारा अपने हस्ताक्षर से 100/- के स्टैम्प पेपर पर शपथ पत्र दिया जायेगा जिसमं यह तथ्य प्रस्तुत किये जायें कि राजकीय सहायता तथा मदरसा द्वारा यिे जानेवाला अंशदान को सम्मिलित करते हुए समस्त धनराशि का उपभोग, राजकीय सहायता प्राप्त होने की तिथि से सम्बन्धित कार्य के लिए तीन माह में कर लिया जाएगा और यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो प्रबन्धक स्वयं दो प्रतिशत मासिक ब्याज के साथ सहायतित धनराशि को निदेशक, यू०पी०एम०वी०टी० को वापस करेगा। उसके द्वारा यदि ऐसा नहीं किया जाता तो निदेशक,  यू०पी०एम०वी०टी० को यह अधिकार होगा कि वह भू-राजस्व की वसूली की भांति आर० सी० जारी करके ब्याज सहित उक्त समस्त धनराशि प्रबन्धक से वसूल कर ले।
    3. प्रबन्धक द्वारा जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के माध्यम से निदेशक, यू०पी०एम०वी०टी० को यह सूचना भी उपलब्ध कराई जायेगी कि मानक के अनुसार उपकरण क्रय करने के लिए कोटेशन/ टेण्डर आदि प्राप्त कर लिये गये हैं (प्राप्त कोटेशन/ टेण्डर की प्रमाणित प्रतियां संलग्न की जाये)।
    4. मिनी आई० टी० आई० चलाने के लिए चयन समिति द्वारा मुख्य अनुदेशक तथा अन्य स्टाफ का चयन कर लिया गया है। (इसका क्रमिकवार विवरण निम्न प्रारूप पर दिया जाय)
    क्रमांक चयनित अभ्यर्थी का नाम पदानाम योग्यता अनुभव आयु वर्तमान निवास स्थान किस संस्था से सम्बद्ध रहे हैं, उसका विवरण (प्रमाण पत्र स‍हित)
                   
    5. ट्रेड जो चयनित किये गये हैं उनका विवरण-
    क्रमांक ट्रेड का नाम
       
    6. चयनित अभ्यर्थियों से सम्बन्धित सूचना-
    क्रमांक चयनित अभ्यर्थी का नाम पिता का नाम स्थायी पता कक्षा यदि शिक्षारत है क्या बोर्डिंग में रहता है अथवा नहीं गत परीक्षा बोर्ड में
                उत्तीर्ण हुआ का स्तर प्राप्त प्रतिशत तथा श्रेणी
    नोट :

    ट्रेडवार अलग-अलग सूचनाये दी जायें।

    7.

    प्रबन्धक एक शपथ पत्र देंगे कि उपरोक्त सभी सूचनाएं पूर्णतया सत्य है और यह कि यदि इनमें से कोई भी सूचना किसी भी जांच में गलत पाई जाती है तो वह उसके लिए सीधे उत्तरदायी होंगे और उनके विरूद्ध विधिक प्राविधानों के अनुसार कार्यवाही भी की जा सकेगी।

    सचिव
    अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग
    उत्तर प्रदेश शासन

परिशिष्ट-1

जिलेवार मदरसों में मिनी आई० टी० आई० स्थापित करने का लक्ष्य

क्रमांक जिले का नाम लक्ष्य
1. रामपुर 4
2. मुरादाबाद 4
3. बिजनौर 4
4. सहारनपुर 4
5. मुजफ्फरनगर 4
6. बरेली 4
7. सिद्धार्थनगर 4
8. कुशीनगर 4
9. बहराइच 4
10. बाराबंकी 4
11. पीलीभीत 4
12. बुलन्दशहर 4
13. बदायुं 4
14. लखनऊ 3
15. गाजियाबाद 3
16. लखीमपुर खीरी 3
17. मऊ 3
18. शाहजहांपुर 3
19. सीतापुर 3
20. बस्ती 3
21. महराजगंज 3
22. देवरिया 3
23. फैजाबाद 3
24. अलीगढ़ 2
25. प्रतापगढ़ 2
26. कानपुर नगर 2
27. आजमगढ़ 2
28. सुल्तानपुर 2
29. इलाहाबाद 2
30. हरदोई 2
31. फतेहपुर 2
32. रायबरेली 2
33. कानपुर देहात 2
34. एटा 2
35. आगरा 2
36. फिरोजाबाद 2
37. उन्नाव 2
38. मेरठ 2
39. बागपत 2
40. गोण्डा 2
41. बलरामपुर 2
42. वाराणसी 2
43. गोरखपुर 2
44. इटावा 2
45. जौनपुर 1
46. मथुरा 1
47. जालौन 1
48. झांसी 1
49. हमीरपुर 1
50. मिर्जापुर 1
51. गाजीपुर 1
52. महोबा 1
53. बांदा 1
54. चित्रकूट 1
55. बलिया 1
56. मैनपुरी 1
57. सोनभद्र 1
58. ललितपुर 1
59. सन्त रविदास नगर 1
60. फर्रूखाबाद 1
61. कन्नौज 1
  योग 140

गैर इन्जीनियरिंग व्यवसाय (ट्रेड)

18. निवार, फीते, दरी एवं गलीचा 120.00 0.50
19. कटाई एवं सिलाई 54.00 0.30
20. कशीदाकारी और निडिल वर्क 54.00 0.25
21. बेंत, भिसा एवं बांस कार्य 60.00 0.30
22. रेशमी एवं ऊनी वस्त्रों की बुनाई 120.00 0.60
23. अलंकृत एवं सज्जा वस्त्रों की बुनाई (हाथ की बुनाई) 120.00 0.60
24. ऊनी वस्त्रों की बुनाई 120.00 0.25
25. जूते चप्पलों का विनिर्माण 54.00 0.25
26. चमड़े का सामान बनाने वाला 54.00 0.30
27. ड्रेस मेकिंग 52.44 0.40
28. मशीन से बुनाई 54.00 0.25
29. बेकर एवं हलवाई 96.00 0.30
30. फलों एवं सब्जियों का प्रिजरवेशन 48.00 0.40
31. ब्लीचिंग, डाइंग और कैलिको प्रिटिंग 90.00 0.30
32. आशुलिपिक (अंग्रेजी) 36.72 0.40
33. सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस 54.00 0.60
34. आशुलिपिक (हिन्दी) 36.72 0.40
35. हेयर एण्ड स्किन केयर 36.00 0.75

मदरसों में प्रस्तावित मिनी आई० टी० आई० में ट्रेड, ट्रेडवार कर्मशाला स्थल क्षेत्र तथा राज्य सरकार स्तर से उपकरण क्रय में सहायता स्वरूप केवल एक बार दी जाने वाली एकमुश्त सहायता राशि का विवरण

क्रमांक ट्रेड का नाम कर्मशाला स्थल क्षेत्र
( प्रति यूनिट वर्ग मीटर में)
राज्य सरकार स्तर से उपकरण क्रय में सहायता स्वरूप केवल एक बार दी जाने वाली एक मुश्त सहायता राशि (लाख रूपये में)
1. वेल्डर (गैस व विद्युत) 76.80 0.75
2. मैकेनिक (डीजल) 63.00 1.00
3. प्लम्बर 52.80 0.25
4. सोफासाज 60.00 0.25
5. मैकेनिक ट्रैक्टर 45.00 1.00
6. शीट मेटल कर्मी 60.00 0.75
7. कारपेण्टर 90.00 0.50
8. कम्प्यूटर आपरेटर तथा प्रोग्रामिंग असिस्टेण्ट 42.00 1.00
9. पेण्टर (सामान्य) 60.00 0.30
10. वायरमैन 54.00 0.60
11. मैकेनिक (मोटर गाड़ी) 63.00 1.00
12. मैकेनिक (कृषि मशीनरी) 72.00 1.00
13. फिटर 85.56 0.75
14. इलेक्ट्रिशियन 73.20 0.75
15. मैकेनिक (रेफ्रिजरेशन एवं एयर कन्डीशनिंग) 60.00 1.00
16. ड्राफट्स मैन (सिविल) 48.00 0.30
17. इलेक्ट्रानिक्स मैकेनिक 42.00 0.75

परिशिष्‍ट-3

मदरसों में प्रस्तावित मिनी आई०टी०इआई० में खोले जाने वाले ट्रेड, प्रति यूनिट छात्र संख्या, पाठ्यक्रम अवधि व शैक्षिक योग्यता का विवरण

क्रमांक ट्रेड का नाम प्रति यूनिट छात्र संख्या न्यूनतम/अधिकतम प्रशिक्षण की अवधि शैक्षिक योग्यता
1. वेल्डर (गैस व विद्युत) 12/16 एक वर्ष फौकानियां
2. मैकेनिक (डीजल) 12/16 एक वर्ष फौकानियां
3. प्लम्बर 12/16 एक वर्ष फौकानियां
4. सोफासाज 12/16 एक वर्ष फौकानियां
5. मैकेनिक ट्रैक्टर 12/16 एक वर्ष फौकानियां
6. शीट मेटल कर्मी 12/16 एक वर्ष फौकानियां
7. कारपेण्टर 12/16 एक वर्ष मुंशी/ मौलवी
8. कम्प्यूटर आपरेटर तथा प्रोग्रामिंग असिस्टेण्ट 12/16 एक वर्ष मुंशी/ मौलवी
9. पेण्टर (सामान्य) 12/16 दो वर्ष मुंशी/ मौलवी
10. वायरमैन 12/16 दो वर्ष फौकानियां
11. मैकेनिक (मोटर गाड़ी) 12/16 दो वर्ष फौकानियां
12. मैकेनिक (कृषि मशीनरी) 12/16 दो वर्ष फौकानियां
13. फिटर 12/16 दो वर्ष मुंशी/ मौलव
14. इलेक्ट्रिशियन 12/16 दो वर्ष मुंशी/ मौलव
15. मैकेनिक (रेफ्रिजरेशन एवं एयर कन्डीशनिंग) 12/16 दो वर्ष मुंशी/ मौलव
16. ड्राफट्स मैन (सिविल) 12/16 दो वर्ष मुंशी/ मौलव
17. इलेक्ट्रानिक्स मैकेनिक 12/16 दो वर्ष मुंशी/ मौलव

गैर इन्जीनियरिंग व्यवसाय (ट्रेड)

18. निवार, फीते, दरी एवं गलीचा 12/16 एक वर्ष फौकानियां
19. कटाई एवं सिलाई 12/16 एक वर्ष फौकानियां
20. कशीदाकारी और निडिल वर्क 12/16 एक वर्ष फौकानियां
21. बेंत, भिसा एवं बांस कार्य 12/16 एक वर्ष फौकानियां
22. रेशमी एवं ऊनी वस्त्रों की बुनाई 12/16 एक वर्ष फौकानियां
23. अलंकृत एवं सज्जा वस्त्रों की बुनाई (हाथ की बुनाई) 12/16 एक वर्ष फौकानियां
24. ऊनी वस्त्रों की बुनाई 12/16 एक वर्ष फौकानियां
25. जूते चप्पलों का विनिर्माण 12/16 एक वर्ष फौकानियां
26. चमड़े का सामान बनाने वाला 12/16 एक वर्ष फौकानियां
27. ड्रेस मेकिंग 12/16 एक वर्ष मुंशी/ मौलव
28. मशीन से बुनाई 12/16 एक वर्ष मुंशी/ मौलव
29. बेकर एवं हलवाई 12/16 एक वर्ष मुंशी/ मौलव
30. फलों एवं सब्जियों का प्रिजरवेशन 12/16 एक वर्ष मुंशी/ मौलव
31. ब्लीचिंग, डाइंग और कैलिको प्रिटिंग 12/16 एक वर्ष मुंशी/ मौलव
32. आशुलिपिक (अंग्रेजी) 12/16 एक वर्ष मुंशी/ मौलव
33. सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस 12/16 एक वर्ष मुंशी/ मौलव
34. आशुलिपिक (हिन्दी) 12/16 एक वर्ष मुंशी/ मौलव
35. हेयर एण्ड स्किन केयर

12/16

एक वर्ष मुंशी/ मौलव

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